देश को मिला नया CJI-जस्टिस सूर्यकांत: गृह प्रदेश हरियाणा में खुशी की लहर
जस्टिस सूर्यकांत बने देश के 53वें CJI, हरियाणा में जश्न का माहौल; परिवार, गांव और बार एसोसिएशन में खुशी की लहर
सोमवार को जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के रूप में शपथ ली। वह हरियाणा से इस सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बन गए।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सूर्यकांत का पूरा परिवार मौजूद रहा। उनके तीनों भाई, उनकी पत्नियां, दोनों बेटियां, दामाद, बहन का परिवार और पैतृक गांव पेटवाड़ के लोग भी शामिल हुए।
उनके बड़े भाई डॉ. शिवकांत ने बताया कि पूरा कुनबा एक दिन पहले ही दिल्ली पहुंच गया था ताकि वे इस ऐतिहासिक पल को करीब से देख सकें।
हिसार में जिला बार एसोसिएशन ने शपथ ग्रहण से पहले विशेष हवन कराया और बाद में वकीलों ने ढोल की थाप पर जमकर नृत्य कर खुशी मनाई।
जस्टिस सूर्यकांत का हिसार और उनके गांव पेटवाड़ से गहरा नाता रहा है। दिवाली पर वह CJI बनने से पहले अपने गांव आए थे, वह भी बिना किसी शोर-शराबे के। वे अपने पुश्तैनी मकान में रुके और परिवार व गांव वालों से मुलाकात की।
गांव में आज भी उनका बड़ा परिवार रहता है—चाचा, ताऊ, भाई, उनके बच्चे और बचपन के दोस्त।
सूर्यकांत ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1984-85 में हिसार जिला अदालत से की थी। लगभग छह माह तक उन्होंने यहां वकालत की और वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय आत्माराम बंसल के साथ जूनियर के रूप में काम किया।
परिवार के अनुसार, सूर्यकांत ने कानून का रास्ता चुना जबकि परिवार में लगभग सभी लोग शिक्षक थे।
उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई पेटवाड़ गांव के सरकारी स्कूल से की और ग्रेजुएशन हिसार के सरकारी कॉलेज से पूरा किया।
बचपन से ही वह तेज-तर्रार, तुरंत जवाब देने वाले और प्रतिभाशाली विद्यार्थी रहे।
ग्रेजुएशन के दौरान लिखी उनकी कविता "मेढ़ पर मिट्टी चढ़ा दो" युवाओं में काफी लोकप्रिय हुई थी।
उनके बड़े भाई शिवकांत बताते हैं कि सूर्यकांत बेहद सरल भोजन पसंद करते हैं। उन्हें बाजरे की रोटी, मिसी रोटी, लहसुन की चटनी, मूंग की दाल और लस्सी बेहद पसंद है।
घर में कुछ भी बना हो, वह उसी में संतुष्ट रहते हैं।
परिवार में एक खास किस्सा यह है कि सूर्यकांत और उनके बड़े भाई देवकांत ने साथ में 10वीं की पढ़ाई की थी, क्योंकि उस समय देवकांत का हाथ फैक्चर होने पर पिता ने उनका एक वर्ष का ड्रॉप करवा दिया था।
10वीं के बाद सूर्यकांत अपने ताऊ के साथ खेतों में भी मदद करते थे।
जस्टिस सूर्यकांत की पत्नी सविता सूर्यकांत अंग्रेजी की प्रोफेसर रहीं और कॉलेज प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं।
उनकी दो बेटियां—मुग्धा और कनुप्रिया—दोनों उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
गांव के बच्चों के लिए सूर्यकांत का विशेष लगाव रहता है। परिवार द्वारा संचालित पंडित राम प्रसाद आत्माराम धर्मार्थ न्यास के माध्यम से वह 10वीं और 12वीं के टॉपर विद्यार्थियों को हर साल सम्मानित करते हैं, और इस संस्था में कोई चंदा नहीं लिया जाता।
उनके पिता मदन गोपाल संस्कृत के अध्यापक और सुप्रसिद्ध साहित्यकार थे।
उन्होंने हरियाणवी में 'रामायण' लिखी थी जिसके लिए उन्हें हिंदी साहित्य अकादमी का सूरदास पुरस्कार मिला था।
उन्होंने कुल 14 पुस्तकें लिखीं और उन्हें हरियाणा के प्रतिष्ठित पंडित लख्मीचंद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
जस्टिस सूर्यकांत के CJI बनने से न सिर्फ उनका परिवार बल्कि पूरा हरियाणा गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
प्रदेश में जगह-जगह मिठाई बांटकर, ढोल बजाकर और हवन कर उनकी सफलता का जश्न मनाया जा रहा है।